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उत्तराखंड: मुनस्यारी में बादल फटने से तबाही, मलबे में बहते दिखे विशाल बोल्डर
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए भारी तबाही मचा दी।
विस्तार
उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए भारी तबाही मचा दी। थल-मुनस्यारी मार्ग पर ला-झेकला के पास तेज बारिश के बाद बादल फटने जैसी स्थिति उत्पन्न हुई, जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में मलबा और पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगा। घटना के बाद सड़क और आसपास का क्षेत्र मलबे से पट गया। इस प्राकृतिक आपदा की भयावह तस्वीरें सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में अचानक तेज बारिश होने के बाद पानी का बहाव काफी बढ़ गया। देखते ही देखते मिट्टी, पत्थर और चट्टानों का मलबा तेज रफ्तार से नीचे आने लगा। मलबे के साथ बड़े-बड़े बोल्डर भी बहते हुए नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में भारी मलबे के बीच विशालकाय पत्थरों को तेज बहाव में नीचे की ओर जाते देखा जा सकता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटना के दौरान पानी और मलबे का बहाव कितना शक्तिशाली रहा होगा। थल-मुनस्यारी मार्ग पर बढ़ा खतरा ला-झेकला के पास हुई इस घटना से थल-मुनस्यारी सड़क मार्ग पर भी खतरा बढ़ गया है। पहाड़ों से अचानक मलबा आने के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण पहले से ही भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने का खतरा बना रहता है। ऐसे में बादल फटने जैसी घटनाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों से अचानक पानी और मलबा नीचे आने से सड़क मार्ग पर चलने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर जहां पहाड़ी ढलान सीधे सड़क से जुड़ी हुई हैं, वहां यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बड़े बोल्डरों ने बढ़ाई दहशत घटना के दौरान मलबे के साथ विशाल बोल्डरों का बहना सबसे भयावह तस्वीरों में से एक रहा। तेज पानी के बहाव में बड़े-बड़े पत्थर भी नीचे की ओर खिसकते दिखाई दिए। ऐसे बोल्डर सड़क, वाहन या आसपास मौजूद किसी भी संरचना को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में घटना को लेकर चिंता बनी हुई है। बादल फटने के बाद प्रभावित क्षेत्र में प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति का जायजा लेने तथा सड़क मार्ग को सुरक्षित बनाने की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है। मार्ग पर मलबा हटाने और यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील मानसून के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है। यात्रियों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर सावधानी बरतने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन न रोकने की सलाह दी जाती है। मुनस्यारी की यह घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को सामने लाती है। तेज बारिश, अचानक बढ़ता जलप्रवाह, भूस्खलन और मलबे के साथ बड़े बोल्डरों का बहाव कुछ ही मिनटों में हालात को बेहद खतरनाक बना सकता है। ऐसे में प्रशासनिक सतर्कता के साथ स्थानीय लोगों और यात्रियों की सावधानी भी बेहद जरूरी है।
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