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उत्तर प्रदेश: सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का आरोप, दो साल से कार्रवाई का इंतजार
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील क्षेत्र के विकासखंड भियांव अंतर्गत ग्राम सभा मढ़वरपुर के चक अज भुजगी में सरकारी जमीन, तालाब और चकमार्ग पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जलालपुर तहसील क्षेत्र के विकासखंड भियांव अंतर्गत ग्राम सभा मढ़वरपुर के चक अज भुजगी में सरकारी जमीन, तालाब और चकमार्ग पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि चकमार्ग और तालाब की जमीन पर लगातार निर्माण कर कब्जा किया जा रहा है, जबकि मामला राजस्व अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार तालाब गाटा संख्या 78 पर सूर्यकांत तिवारी द्वारा मकान बनाए जाने तथा वहां “गो संरक्षण केंद्र” का बोर्ड लगाए जाने का मामला सामने आया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि भूमि राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है तो उस पर निजी निर्माण या गो संरक्षण केंद्र संचालित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई? तीन बार जांच, फिर भी कार्रवाई का इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि मामले में राजस्व विभाग की टीम द्वारा करीब तीन बार जांच/सत्यापन किया जा चुका है और जांच के दौरान कथित अवैध कब्जे की पुष्टि भी हुई। इसके बावजूद लंबे समय से जमीन को कब्जामुक्त नहीं कराया गया। बताया जा रहा है कि जून 2025 में तहसील प्रशासन द्वारा बेदखली का नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उसके बाद भी कथित कब्जा बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मुख्यमंत्री के आदेशों के बीच प्रशासन पर सवाल सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने को लेकर प्रदेश सरकार लगातार सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब राजस्व अभिलेखों, जांच और नोटिस की प्रक्रिया सामने आ चुकी है, तो आखिरकार कथित कब्जाधारियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई कब होगी? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से मांग की है कि गाटा संख्या 78, गाटा संख्या 29, 33 और चकमार्ग संख्या 37 की निष्पक्ष पैमाइश कराकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि कब्जा अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है, या फिर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का यह मामला सिर्फ नोटिस और जांच तक ही सीमित रह जाएगा।
इसी ग्राम सभा में श्रीकांत तिवारी द्वारा भी कथित रूप से मकान बनाए जाने की बात सामने आई है। वहीं बंजर भूमि के गाटा संख्या 29 और 33 तथा चकमार्ग संख्या 37 पर भी राज बहादुर तिवारी द्वारा मकान बनाकर कब्जा किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
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