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राजस्थान: उदयपुर नगर निगम चुनाव: 80 वार्डों का आरक्षण जारी, महापौर पद अनारक्षित

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राजस्थान  Published by: Anil Sahu , राजस्थान  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 17/08/2026 05:22:57 pm Share:
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संक्षेप

राजस्थान: आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर वार्डों के आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होते ही उदयपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नगर निगम के कुल 80 वार्डों में विभिन्न वर्गों के लिए आ

विस्तार

राजस्थान: आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर वार्डों के आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होते ही उदयपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नगर निगम के कुल 80 वार्डों में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण तय कर दिया गया है। वहीं महापौर पद अनारक्षित (ओपन) होने से इस बार का चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। 80 वार्डों में आरक्षण का स्वरूप जारी आरक्षण सूची के अनुसार सामान्य वर्ग: 48 वार्ड, जिनमें 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित ओबीसी 16 वार्ड, जिनमें 5 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित एससी: 8 वार्ड, जिनमें 3 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित एसटी: 8 वार्ड, जिनमें 3 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित इस प्रकार कुल 32 सामान्य ओपन, 16 सामान्य महिला, 11 ओबीसी ओपन, 5 ओबीसी महिला, 5 एससी ओपन, 3 एससी महिला, 5 एसटी ओपन और 3 एसटी महिला वार्ड निर्धारित किए गए हैं।

वार्डवार आरक्षण सूची सामान्य ओपन वार्ड: 1, 3, 5, 10, 12, 15, 18, 19, 20, 24, 25, 26, 28, 29, 33, 39, 44, 45, 46, 49, 50, 51, 53, 54, 56, 63, 64, 66, 70, 75, 78, 80 सामान्य महिला वार्ड: 4, 8, 16, 17, 27, 31, 35, 36, 40, 52, 57, 58, 60, 69, 73, 76 ओबीसी ओपन वार्ड: 2, 6, 11, 14, 21, 22, 23, 48, 71, 72, 74 ओबीसी महिला वार्ड: 34, 38, 55, 61, 68 एससी ओपन वार्ड: 7, 9, 30, 32, 37 एससी महिला वार्ड: 59, 67, 47 एसटी ओपन वार्ड: 41, 43, 65, 77, 79 एसटी महिला वार्ड: 13, 42, 62
महापौर पद अनारक्षित, मुकाबला हुआ रोचक महापौर पद अनारक्षित (ओपन) होने से भाजपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। दोनों प्रमुख दलों के नेता अपने-अपने राजनीतिक खेमों में सक्रिय होकर वरिष्ठ नेतृत्व से संपर्क साधने में जुट गए हैं। 

अब महापौर पद किसी आरक्षित वर्ग तक सीमित नहीं रहने से राजनीतिक जनाधार, संगठन में पकड़, सामाजिक समीकरण और वार्ड स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। आरक्षण की घोषणा के बाद कई मौजूदा पार्षदों और नए दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं। कुछ नेताओं को अपने वार्ड के आरक्षण के अनुसार नई रणनीति बनानी होगी, जबकि नए चेहरों के लिए भी चुनावी मैदान में उतरने के अवसर बढ़ गए हैं। भाजपा-कांग्रेस में टिकट की दौड़ तेज वार्डों का आरक्षण सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना है। संभावित उम्मीदवार जनसंपर्क बढ़ाने के साथ-साथ संगठन के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी दावेदारी पहुंचाने में जुट गए हैं।


विशेष बात यह है कि महापौर पद अनारक्षित होने से पार्षद चुनाव का महत्व भी बढ़ गया है। जिस दल के पास बहुमत होगा, उसके पार्षद महापौर के चयन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए हर वार्ड में मजबूत उम्मीदवार उतारना बड़ी चुनौती बन गया है। निष्कर्ष कुल मिलाकर 80 वार्डों का आरक्षण और महापौर पद का अनारक्षित होना उदयपुर नगर निगम चुनाव को बेहद रोमांचक बना रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा और कांग्रेस महापौर पद के लिए किस चेहरे पर भरोसा जताती हैं और वार्डवार टिकट वितरण में किन नए और पुराने चेहरों को मैदान में उतारा जाता है।
 

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