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राजस्थान: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मिर्धा कॉलेज में जिला स्तरीय कार्यक्रम, नाटक और कविताओं से बयां हुई त्रासदी
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संक्षेप
राजस्थान: भारत विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन, सदमे एवं बेघर होने की त्रासदी की स्मृतियों को सहेजने तथा नई पीढ़ी को इस इतिहास के मार्मिक अध्याय से अवगत कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम श्री बलदेवराम मिर्धा राजकीय महाविद्यालय सभागार में आयोजित किया गया।
विस्तार
राजस्थान: भारत विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन, सदमे एवं बेघर होने की त्रासदी की स्मृतियों को सहेजने तथा नई पीढ़ी को इस इतिहास के मार्मिक अध्याय से अवगत कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम श्री बलदेवराम मिर्धा राजकीय महाविद्यालय सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों की पीड़ा, संघर्ष, बिछोह और मानवीय संवेदनाओं को विभिन्न प्रस्तुतियों एवं विचारों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व विधायक मोहनराम चौधरी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को विभाजन के दौरान अपने जीवन, घर-परिवार एवं परिचित परिवेश से बिछड़ने वाले लाखों लोगों की पीड़ा और संघर्ष को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने का अवसर बताया। उन्होंने विभाजन की मानवीय त्रासदी को स्मरण करते हुए सामाजिक सौहार्द, मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के मूल्यों को और सुदृढ़ करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत सिंह गोदारा एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष जैन रहे। मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत सिंह गोदारा ने अपने वक्तव्य में कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करना केवल अतीत की पीड़ा को स्मरण करना नहीं है, बल्कि इससे वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को शांति, सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का महत्व समझने की प्रेरणा मिलती है। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि विभाजन की विभीषिका से जुड़ी स्मृतियां हमें मानवीय संवेदनाओं, आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को मजबूत करने की सीख देती हैं। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी और उसके मानवीय पक्ष को केंद्र में रखते हुए नाटक का मंचन किया गया। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से उस दौर की पीड़ा, बिछोह, विस्थापन और परिवारों से अलग होने की संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम में श्री बलदेवराम मिर्धा राजकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा कविता पाठ किया गया तथा विद्यार्थियों ने विभाजन की पीड़ा, उससे जुड़ी मानवीय संवेदनाओं और इतिहास से मिलने वाली सीख पर अपने विचार साझा किए। महाविद्यालय की फैकल्टी एवं अध्यापकों ने भी विभाजन की विभिन्न पीड़ाओं, विस्थापन, बिछोह और उस दौर में आमजन द्वारा झेली गई मानवीय त्रासदी के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की स्मृतियों को याद करने का उद्देश्य अतीत की पीड़ा को समझने के साथ-साथ वर्तमान और भावी पीढ़ी को शांति, सद्भाव, भाईचारे एवं राष्ट्रीय एकता का महत्व समझाना है। कार्यक्रम में विभाजन की विभीषिका में प्रभावित हुए लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की कार्यक्रम में महाविद्यालय की फैकल्टी, अध्यापक, विद्यार्थी एवं अन्य उपस्थितजन सहभागिता की।
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