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छत्तीसगढ़: NH-53 पर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप, साईं ट्रेवल्स की बसों में ओवरलोडिंग की शिकायत
- Photo by : social media
संक्षेप
छत्तीसगढ़: देश की राजधानी से सटे एनसीआर और राष्ट्रीय मीडिया की नजर अब छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्ग 53 (NH-53) पर धड़ल्ले से चल रहे एक बड़े परिवहन घोटाले पर पड़ी है। रायपुर-महासमुंद-सरायपाली-सारंगढ़ मार्ग पर चलने वाली 'साईं ट्रेवल्स' की बसों में न केवल यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है,
विस्तार
छत्तीसगढ़: देश की राजधानी से सटे एनसीआर और राष्ट्रीय मीडिया की नजर अब छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्ग 53 (NH-53) पर धड़ल्ले से चल रहे एक बड़े परिवहन घोटाले पर पड़ी है। रायपुर-महासमुंद-सरायपाली-सारंगढ़ मार्ग पर चलने वाली 'साईं ट्रेवल्स' की बसों में न केवल यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है, बल्कि टैक्स चोरी और अवैध वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। दिल्ली मीडिया (NCR News) के हाथ लगे पुख्ता डिजिटल और जीपीएस साक्ष्यों (लखोली, छत्तीसगढ़ के पास की तस्वीरें) से इस पूरे काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। भ्रष्टाचार का पूरा खेल: 3 बड़े खुलासे पहला खेल: निर्धारित दर से अधिक किराया वसूली छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक इस रूट का जो सरकारी किराया तय है, साईं ट्रेवल्स के संचालक यात्रियों से उससे कहीं अधिक (₹150 से ₹200 तक) मनमाना किराया वसूल रहे हैं। दूसरा खेल: बिना टिकट अवैध उगाही (टैक्स चोरी) बस संचालक और परिचालक (कंडक्टर) गैलरी में खड़े होकर सफर करने वाले यात्रियों से पूरा पैसा वसूल रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई टिकट जारी नहीं की जा रही है। बिना टिकट पैसे सीधे बस स्टाफ की जेब और मालिकों के अवैध मुनाफे में जा रहे हैं, जिससे राज्य सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व (टैक्स) का चूना लग रहा है। तीसरा खेल: कार्रवाई से बचने का हथकंडा जिम्मेदार मौन क्यों? जीपीएस कैमरों में कैद यह तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि महंगी एसी बसों में भेड़-बकरियों की तरह इंसानों को ठूंसकर सफर कराया जा रहा है। नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार के दौरान ऐसी ओवरलोडिंग कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाईवे पर जगह-जगह मौजूद स्थानीय पुलिस और आरटीओ की चौकियां इन बसों को देखकर भी आंखें क्यों मूंदे हुए हैं? क्या यह चुप्पी किसी मोटी 'मासिक बंधी' (रिश्वत) का नतीजा है? एनसीआर न्यूज़ इस मामले को सीधे केंद्रीय परिवहन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठा रहा है। डिजिटल सबूतों के आधार पर अब देखना यह होगा कि 'साईं ट्रेवल्स' के इस अवैध सिंडिकेट और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
टिकट न देने के पीछे एक सोची-समझी साजिश है। यदि कभी आरटीओ (RTO) या पुलिस की चेकिंग होती है, तो बस संचालक यह दावा कर सकें कि खड़े यात्री उनकी बस के नहीं हैं या वे बस अभी-अभी चढ़े हैं। टिकट न होने के कारण हादसे की स्थिति में इन गरीब यात्रियों को कोई बीमा या मुआवजा भी नहीं मिल सकेगा।
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