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हरियाणा: हरियाणा की महिलाएं बनेंगी ‘किसान सहायक दीदी’, गांव-गांव जाकर करेंगी मृदा परीक्षण
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संक्षेप
हरियाणा: हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (HSRLM) के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी और क्रांतिकारी पहल की गई है। उपायुक्त महेंद्र पाल के मार्गदर्शन में अब महिला स्वयं सहायता समूहों
विस्तार
हरियाणा: हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (HSRLM) के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी और क्रांतिकारी पहल की गई है। उपायुक्त महेंद्र पाल के मार्गदर्शन में अब महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सदस्यों को 'किसान सहायक दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये महिलाएं न केवल मिट्टी के नमूने एकत्रित करेंगी, बल्कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर किसानों को वैज्ञानिक कृषि परामर्श भी देंगी। कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा: प्रशिक्षित किसान सहायक दीदी गांव-गांव जाकर मिट्टी के नमूने एकत्र करेंगी और उनका परीक्षण करेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि की उर्वरता (Fertility) के अनुसार सही और संतुलित उर्वरक (Fertilizer) के उपयोग के प्रति जागरूक करना है। खेती की लागत में कमी: इस पहल का सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। सही उर्वरक के उपयोग से न केवल खेती की अनावश्यक लागत कम होगी, बल्कि उत्पादन में भी गुणात्मक वृद्धि होगी और भूमि की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी। डॉ. राजीव भाटिया (तकनीकी सहायक, कृषि विभाग), डॉ. सतबीर सिंह (एसटीओ, हांसी)
महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर: जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त जरिया है। उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए और सम्मानजनक अवसर प्राप्त होंगे। विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों ने महिलाओं को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया। प्रशिक्षण देने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि किसान सहायक दीदी की यह टीम कृषि विभाग के साथ तालमेल बिठाकर कार्य करेगी, जिससे किसानों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण मृदा परीक्षण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इस अवसर पर नगराधीश रोहित कुमार सहित जिले के अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन और एचएसआरएलएम का यह प्रयास न केवल 'महिला सशक्तिकरण' का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि यह 'टिकाऊ कृषि' (Sustainable Agriculture) की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
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