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राजस्थान: तत्त्वार्थ सूत्र की परीक्षा में 108 श्रद्धालुओं ने लिया भाग, ज्ञानार्जन को लेकर दिखा उत्साह

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राजस्थान  Published by: Jinesh Kumar Jain , राजस्थान  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 19/08/2026 09:50:14 am Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 19/08/2026 09:50:14 am
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संक्षेप

राजस्थान: श्री दिगंबर जैन मंदिर, वरुण पथ, मानसरोवर जयपुर में परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री विभा श्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में चल रही तत्त्वार्थ सूत्र एवं भक्तामर की नियमित कक्षाओं के अंतर्गत आज तत्त्वार्थ सूत्र के अध्याय की परीक्षा आयोजित की गई।

विस्तार

राजस्थान: श्री दिगंबर जैन मंदिर, वरुण पथ, मानसरोवर जयपुर में परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री विभा श्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में चल रही तत्त्वार्थ सूत्र एवं भक्तामर की नियमित कक्षाओं के अंतर्गत आज तत्त्वार्थ सूत्र के अध्याय की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रचार संयोजक जिनेश कुमार जैन ने बताया कि परीक्षा में 108 श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। परीक्षा हॉल में महिलाओं एवं पुरुषों की लगभग बराबर भागीदारी रही और पूरा हॉल ज्ञानार्जन के इस अनूठे उत्साह से भरा नजर आया। सभी प्रतिभागियों ने शांत वातावरण में पूरी गंभीरता एवं एकाग्रता के साथ परीक्षा देकर धर्म और ज्ञान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष जे. के. जैन एवं मंत्री ज्ञान बिलाला ने बताया कि तत्त्वार्थ सूत्र के विभिन्न अध्यायों के पूर्ण होने पर समय-समय पर इसी प्रकार परीक्षाएँ आयोजित की जाती रहेंगी। प्रत्येक परीक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को मंदिर समिति द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा।
मंदिर समिति के उपाध्यक्ष लोकेश सोगानी एवं कोषाध्यक्ष हेमेंद्र सेठी ने बताया कि नियमित रूप से अध्ययन करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतिम समापन एवं पुरस्कार समारोह में सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया जाएगा। 

संगठन मंत्री सुनील गंगवाल एवं उप संगठन मंत्री राजेंद्र सोनी ने बताया कि ज्ञानार्जन के इस अभियान के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं एवं बच्चों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि समाज में धर्म एवं आध्यात्मिक अध्ययन के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में धर्म, संस्कार, संयम और आत्मजागरण को उतारने का माध्यम है। इस ज्ञानयज्ञ से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को जोड़ने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।


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