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उत्तर प्रदेश: रेल कोच फैक्टरी में अखिल भारतीय सेवानिवृत्त रेलवे मेन्स फेडरेशन का वार्षिक समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: बचपन की पढ़ाई से आईपीएस बनने तक, संघर्ष और संकल्प की मिसाल हैं बरेली के नए एसपी सिटी चिराग जैन डीग से एनआईटी जयपुर और टाटा मोटर्स की नौकरी से यूपीएससी तक का सफर, तीसरे
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बचपन की पढ़ाई से आईपीएस बनने तक, संघर्ष और संकल्प की मिसाल हैं बरेली के नए एसपी सिटी चिराग जैन डीग से एनआईटी जयपुर और टाटा मोटर्स की नौकरी से यूपीएससी तक का सफर, तीसरे प्रयास में हासिल की 160वीं रैंक; अब बरेली में संभालेंगे शहर की कानून-व्यवस्था की कमान जीवन में सफलता हासिल करने के लिए केवल अच्छी शिक्षा और बेहतर अवसर ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, असफलताओं से सीखने का जज्बा और लगातार मेहनत करने का संकल्प भी जरूरी होता है। राजस्थान के डीग से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने, टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी पाने और फिर उस नौकरी को छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटने वाले आईपीएस अधिकारी चिराग जैन की कहानी इसी संकल्प की मिसाल है। तीसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 160वीं रैंक हासिल कर उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई। अब उन्हें बरेली शहर के पुलिस अधीक्षक नगर यानी एसपी सिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तकनीकी शिक्षा, निजी क्षेत्र में काम करने का अनुभव और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान मिले अनुभवों के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में अपना करियर बनाया। अब बरेली में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके सामने है। डीग में हुई शुरुआती पढ़ाई, एनआईटी जयपुर से इंजीनियरिंग चिराग जैन का जन्म 23 सितंबर 1994 को हुआ था। वह राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र के डीग के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा डीग में हुई। इसके बाद उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी एनआईटी जयपुर में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने तकनीकी विषयों, समस्याओं के विश्लेषण और व्यवस्थित तरीके से समाधान तलाशने की समझ विकसित की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने निजी क्षेत्र में करियर बनाने का अवसर था। उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया और टाटा मोटर्स में नौकरी हासिल की। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। एक ओर निजी क्षेत्र में नौकरी का अनुभव था, तो दूसरी ओर देश की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने की चुनौती। उन्होंने अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखने का निर्णय लिया। पहले और दूसरे प्रयास में नहीं मिली सफलता, तीसरी बार में बने आईपीएस यूपीएससी की तैयारी के दौरान चिराग जैन को शुरुआती प्रयासों में असफलताओं का सामना करना पड़ा। मीडिया में प्रकाशित उनकी सफलता की कहानी के अनुसार, पहले प्रयास में वह मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन तक नहीं पहुंच सके। दूसरे प्रयास में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। इस सफलता के बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित किया गया और उत्तर प्रदेश कैडर मिला। इस तरह इंजीनियरिंग और निजी नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर पुलिस सेवा तक पहुंचा। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में शुरुआती असफलताओं के कारण अपना लक्ष्य छोड़ने के बारे में सोचने लगते हैं। तैयारी के दौरान मेहनत के साथ रणनीति पर भी दिया ध्यान यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं होता। विषयों की समझ, नियमित अभ्यास, समय प्रबंधन और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उनमें सुधार करना भी महत्वपूर्ण होता है। चिराग जैन की तैयारी से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि उन्होंने पढ़ाई के लिए अधिक समय देना शुरू क
वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी चिराग जैन ने बरेली में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह आजमगढ़ में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के पद पर तैनात थे। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की रही है।
पिता स्वास्थ्य विभाग में रहे कार्यरत, मां ने संभाली परिवार की जिम्मेदारी चिराग जैन के पिता का नाम धर्मेंद्र कुमार जैन है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत रहे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार की पृष्ठभूमि और शुरुआती जीवन से जुड़े विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से सीमित हैं, लेकिन उनकी शैक्षिक यात्रा से स्पष्ट होता है कि उन्होंने पढ़ाई के माध्यम से अपने करियर को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। परिवार से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नौकरी और सिविल सेवा की तैयारी के बीच उन्होंने ऐसा रास्ता चुना, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। टाटा मोटर्स की नौकरी छोड़कर चुना सिविल सेवा का रास्ता
बीटेक करने के बाद चिराग जैन को टाटा मोटर्स में नौकरी मिली। उन्होंने पुणे में करीब एक वर्ष तक काम किया। निजी कंपनी में नौकरी के दौरान उनके पास एक स्थिर करियर बनाने का अवसर था, लेकिन उनकी रुचि प्रशासनिक और पुलिस सेवा की ओर बनी रही। वह ऐसी जिम्मेदारी निभाना चाहते थे, जिसमें समाज से जुड़े मुद्दों, कानून-व्यवस्था और जनसेवा के क्षेत्र में सीधे काम करने का अवसर मिले।
लगातार दो प्रयासों में मनचाहा परिणाम नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी का आकलन किया, कमियों को दूर करने पर ध्यान दिया और परीक्षा की मांग के अनुरूप रणनीति में बदलाव किया। आखिरकार तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई। वर्ष 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 160वीं रैंक हासिल की।