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उत्तर प्रदेश: सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सीडीओ संत कुमार का मामला लंबित, वित्तीय क्षति का ब्योरा न मिलने पर शासन ने मांगी दोबारा रिपोर्ट
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े विभागीय मामलों में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया जारी रहती है। औरैया के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार के मामले में भी विभागीय कार्रवाई की फाइल अभी बंद नहीं हुई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े विभागीय मामलों में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया जारी रहती है। औरैया के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार के मामले में भी विभागीय कार्रवाई की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके संत कुमार के विरुद्ध कार्रवाई के प्रस्ताव पर शासन ने एक बार फिर जिलाधिकारी से स्पष्ट आख्या मांगी है। ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त की ओर से 28 अक्टूबर को भेजे गए पत्र के बाद मामला फिर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आ गया है। विभागीय पत्र के अनुसार, पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव में वित्तीय क्षति का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। इस कमी पर आपत्ति जताते हुए विभाग ने जिलाधिकारी औरैया से मामले के सभी तथ्यों का परीक्षण कर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही वित्तीय क्षति का विवरण और अपनी संस्तुति शामिल करते हुए सुविचारित प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्ताव में वित्तीय क्षति का ब्योरा नहीं मिलने पर आपत्ति किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के मामले में आरोपों के साथ संबंधित तथ्यों और वित्तीय पहलुओं का स्पष्ट होना भी महत्वपूर्ण होता है। शासन की ओर से उठाई गई आपत्ति इसी बिंदु से जुड़ी है। पहले भेजे गए प्रस्ताव में वित्तीय क्षति का स्पष्ट विवरण नहीं होने के कारण विभाग ने जिलाधिकारी से दोबारा रिपोर्ट मांगी है। अब जिलाधिकारी को उपलब्ध अभिलेखों और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामले की समीक्षा कर अपनी स्पष्ट संस्तुति देनी होगी। इसके बाद ही शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जा सकेगा। 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो चुके हैं संत कुमार तत्कालीन सीडीओ संत कुमार 30 अप्रैल 2026 को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद उनके कार्यकाल से संबंधित प्रकरण में विभागीय प्रक्रिया जारी है। सेवानिवृत्ति के बाद भी लंबित विभागीय मामलों में नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित सेवा नियमों, जांच के निष्कर्षों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को आधार बनाया जाता है। जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त की ओर से 28 अक्टूबर को भेजे गए पत्र के बाद अब जिलाधिकारी की आख्या महत्वपूर्ण हो गई है। जिलाधिकारी की ओर से वित्तीय क्षति का स्पष्ट विवरण और संस्तुति सहित प्रस्ताव शासन को भेजे जाने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल सेवानिवृत्ति के करीब छह महीने बाद भी पूर्व सीडीओ संत कुमार से जुड़ा प्रकरण विभागीय स्तर पर लंबित है। शासन की ओर से दोबारा जवाब मांगे जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और शासन इस पर क्या निर्णय लेता है।
पेंशन संबंधी किसी कार्रवाई को लेकर भी फिलहाल कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए इस स्तर पर पेंशन रोकने या उसमें कटौती किए जाने की बात कहना उचित नहीं होगा।
