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उत्तर प्रदेश: दशहरे पर मां विंध्यवासिनी धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्तों ने किया दर्शन-पूजन

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उत्तर प्रदेश  Published by: nihal sonkar , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda Bahuguna, Date: 20/10/2026 10:58:23 am Share:
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  • Edited By.: Yashoda Bahuguna,
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  • 20/10/2026 10:58:23 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: विजयदशमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: विजयदशमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। हजारों श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

दशहरे के पर्व का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। इसे बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयदशमी के दिन शुरू किए गए कार्यों में सफलता और विजय प्राप्त होने की कामना की जाती है। इसी विश्वास के चलते लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं।

ऐतिहासिक मान्यताओं के मुताबिक, प्राचीन काल में राजा विजयदशमी के अवसर पर विजय की प्रार्थना करते हुए युद्ध अभियान के लिए प्रस्थान किया करते थे। समय के साथ यह पर्व धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक उत्साह का प्रतीक बन गया। देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरे के अवसर पर मेले आयोजित किए जाते हैं और रामलीलाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन तथा रावण पर उनकी विजय की कथा प्रस्तुत की जाती है। कई स्थानों पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन भी किया जाता है।

विजयदशमी को भगवान श्रीराम की विजय और मां दुर्गा की शक्ति के प्रतीक पर्व के रूप में मनाया जाता है। दोनों ही परंपराएं बुराई के अंत और धर्म की स्थापना का संदेश देती हैं। यह त्योहार लोगों में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

दशहरे का संदेश केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों को त्यागने से भी जुड़ा है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसी दस बुराइयों से दूर रहने का संकल्प इस पर्व की भावना को सार्थक बनाता है। मां विंध्यवासिनी धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने पर्व के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाया।


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