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मध्य प्रदेश: ग्राम सुपला में स्वामित्व योजना के तहत हितग्राहियों को मिली रजिस्ट्री, जिले में 54 हजार पंजीयन पूर्ण
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी भूमि और आवासीय संपत्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इ
विस्तार
मध्य प्रदेश: प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी भूमि और आवासीय संपत्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल उनका संपत्ति संबंधी अधिकार मजबूत होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह दस्तावेज महत्वपूर्ण आधार बनेगा। ग्रामीण अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण सहित अन्य आर्थिक एवं वैधानिक कार्यों के लिए कर सकेंगे। मंत्री पटेल ने यह बात धनतेरस के अवसर पर नरसिंहपुर जिले के ग्राम सुपला में स्वामित्व योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर हितग्राहियों को आबादी भूमि के स्वामित्व संबंधी पंजीकृत दस्तावेज प्रदान किए गए। इस अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, रामसनेही पाठक, महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी, सरपंच सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, सीईओ जिला पंचायत गजेन्द्र सिंह नागेश, अपर कलेक्टर अरविंद कुमार सिंह, एसडीएम महेंद्र सिंह पटेल, तहसीलदार अमित रिनायते, हितग्राही और ग्रामीणजन मौजूद थे। मंत्री पटेल ने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर वर्षों से निवास करने वाले अनेक परिवारों के पास अपनी संपत्ति का पुख्ता वैधानिक दस्तावेज नहीं होता था। अब स्वामित्व योजना के माध्यम से उन्हें अपनी भूमि और मकान के स्वामित्व का दस्तावेज प्राप्त हो रहा है। मंत्री पटेल ने ग्राम सुपला में स्वामित्व योजना के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की जानकारी लेते हुए कहा कि भूमि संबंधी पारिवारिक विवादों का समाधान आपसी बातचीत, समझाइश और सहमति से किया जाना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, गांव के बुजुर्गों और जिम्मेदार नागरिकों से ऐसे विवादों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांवों में पहले आपसी बैठकों और पंचायतों के माध्यम से अनेक विवादों का समाधान कर लिया जाता था। आपसी सहमति से विवादों का निराकरण कर संबंधित न्यायालय में राजीनामा प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे परिवारों के बीच सद्भाव बना रहेगा और पात्र व्यक्तियों को उनका अधिकार भी मिल सकेगा।
